हॉकी वर्ल्ड कप: कैप्टन मनप्रीत सिंह बोले- हम दुनिया की किसी भी टीम को हरा सकते हैं

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नमस्कार दोस्तों,

भारतीय हॉकी टीम के कप्तान मनप्रीत सिंह का मानना है कि हाल ही में होने वाले  हॉकी वर्ल्ड कप में उनकी टीम किसी भी विपक्षी को हराने के लिए पूरी तरह से तैयार है। मनप्रीत ने हमारे सहयोगी टाइम्स ऑफ इंडिया से खास बातचीत के दौरान कहा कि कप्तानी को लेकर उन पर किसी तरह का दबाव नहीं है और वह मैदान पर अपना बेस्ट देने की कोशिश करते हैं। 

भारतीय टीम ने चैम्पियंस ट्रोफी में सिल्वर मेडल जीता जिसके बाद एशियन चैम्पियंस ट्रोफी में संयुक्त रूप से विजेता बना। हॉकी वर्ल्ड कप भुवनेश्वर की मेजबानी में 28 नवंबर से शुरू होगा। मनप्रीत ने कहा, ‘कप्तानी को लेकर मुझपर किसी भी प्रकार का कोई प्रेशर नहीं है। जब भी मैं टर्फ पर उतरता हूं, तो अपना बेस्ट देने की कोशिश करता हूं। टीम में हर प्लेयर का कुछ रोल है और मैं भाग्यशाली समझता हूं कि हमारे पास ऐसे खिलाड़ी हैं जो टीम के लिए बेस्ट देने का प्रयास करते हैं।’ 
कैप्टन ने कहा, ‘वर्ल्ड कप एक बड़ा टूर्नामेंट है और ऐसे टूर्नामेंट में आपको हर कदम सोंच समझ कर बढ़ाना पढता है। हम हर दिन बेहतर खेलकर उस दिन को खास बनाने में विश्वास रखते हैं । यदि हम अपनी ताकत के हिसाब से खेलते हैं तो दुनिया की किसी भी टीम को हरा सकते हैं लेकिन इस समय हम इतनी दूर की नहीं सोच सकते। मैच के हिसाब से रणनीति बनानी होगी।’ 

उन्होंने कहा, ‘दर्शकों का सपॉर्ट बड़ी भूमिका अदा करता है और हमें बेहतर करने के लिए ताकत और प्रेरणा देता है। अपने घरेलू मैदान पर खेलने से उम्मीदें भी ज्यादा होती हैं।’ कोच हरेंद्र सिंह के मार्गदर्शन पर उन्होंने कहा, ‘चैम्पियंस ट्रोफी से उनके साथ सफर शुरू हुआ और हम टूर्नमेंट में बढ़िया खेले हैं । एशियन गेम्स में जरूर कुछ गलतियां हुई और प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा लेकिन यह गेम का हिस्सा है। उनके होने से ड्रेसिंग रूम में पॉजिटिव वाइब्स रहती हैं।’ 

भारत को टूर्नामेंट में खतरे के सवाल पर उन्होंने कहा, ‘हमें टूर्नामेंट में किसी भी टीम को हल्के में नहीं लेना चाहिए। हर टीम यहां बेस्ट प्रैक्टिस के बाद ही आई है। यह जरूरी है कि हमें रणनीति के हिसाब से सोचना होगा।’ उन्होंने साथ ही कहा कि अंतिम मिनटों में गोल खाना भी दुर्भाग्यपूर्ण है लेकिन इससे बचने के लिए हमने कड़ी ट्रेनिंग और मेहनत  की है। 

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महिला टी20 विश्व कप में भारत के प्रदर्शन पर हरमनप्रीत ने कहा- कोच ने बदली अपनी मानसिकता

mahila cricket team india 2018

आईसीसी टी20 महिला विश्व कप में टीम इंडिया सेमीफाइनल के लिए पूरी तरह से तैयार है. अपने ग्रुप में सभी लीग मैच जीत कर सेमीफाइनल में पहुंची भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर ने आईसीसी महिला टी20 विश्व कप में भारत को मिल रही इस शानदार सफलता का सारा श्रेय नए कोच रमेश पोवार को दते हुए कहा कि उनके आने से टीम की मानसिकता में काफी बदलाव आया है।
वेस्टइंडीज में खेले जा रहे इस टी20 विश्व कप में भारतीय टीम शुक्रवार शाम (भारतीय समयानुसार शनिवार सुबह) सेमीफाइनल में इंग्लैंड से भिड़ेगी. हरमनप्रीत का यह बयान तब आया है जब महिला टीम इंडिया ने अभूतपूर्व सफलता हासिल करते हुए टी20 वर्ल्डकप में अपने चारों लीग मैच जीत कर सेमीफाइल में अपनी जगह बनाई है.
पोवार को तुषार अरोठे की विवादास्पद हालात में रवाना किये जाने के बाद कोच बनाया गया था।  हरमनप्रीत ने सेमीफाइनल की पूर्व संध्या पर कहा, ‘‘ नए कोच के आने से हमारी रणनीति बेहतर हुई है और लक्ष्य बड़े हुए हैं. सभी खिलाडियों का आत्मविश्वास भी बढा है. मैं अपने कोच रमेश पोवार को इसका श्रेय देना चाहूंगी क्योंकि उनके आने के बाद से हमारा खेल के प्रति रवैया, मानसिकता और खेल समझ बदली है.’’ पोवार के आने के बाद पोवार की टीम से काफी तारीफ मिल रही है और पोवार का असर टीम के प्रदर्शन पर भी दिखाई दे रहा है।
Romesh Powar
बदला नहीं लेना, जीत लय कायम रखना है
उन्होंने कहा, ‘‘हमारा लक्ष्य जीत की लय को बरकरार रखना होगा, बदला लेना नहीं.’’ इंग्लैंड ने पिछले साल 50 ओवरों के विश्व कप फाइनल में भारत को हराया था. भारतीय टीम ने अभी तक टी20 विश्व कप में अपने सारे लीग मैच जीते हैं और टीम के हौसले काफी बुलंद हैं।  हरमनप्रीत ने कहा, ‘‘हमें वर्तमान में जीना होगा. फिलहाल हम अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं. अतीत के बारे में सोचने की बजाय हमें लय कायम रखने पर फोकस करना होगा।’’
इंग्लैंड के लिए अलग मैच है यह
इंग्लैंड की कप्तान हीथर नाइट ने कहा कि शुक्रवार का मुकाबला पिछले साल के विश्व कप से अलग होगा. उन्होंने कहा, ‘‘यह अलग प्रारूप है, अलग टीम और अलग कप्तान है. अब 50 ओवरों के विश्व कप का प्रदर्शन मायने नहीं रखता.’’ उन्होंने कहा, ‘‘अब सब कुछ कल पर निर्भर करेगा. टी20 क्रिकेट में मैच के दिन कुछ भी हो सकता है. हमें अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होगा.’’
इसी टी20 विश्व कप तक ही कोच हैं पोवार इस टीम के
रमेश पोवार महिला टीम इंडिया के आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप तक कोच रहेंगे. उन्हें इसी साल अगस्त में ही महिला टीम इंडिया का पूर्णकालिक कोच नियुक्त किया गया था. पिछले डेढ़ साल में पोवार महिला टीम से जुड़ने वाले तीसरे कोच हैं।  अरोठे से पहले इस पद पर पूर्णिमा राव थी जिन्हें 2017 में महिला विश्व कप से कुछ महीने पहले हटा दिया गया था।  पोवार ने टीम इंडिया के लिए 2004 से 2007 के बीच 31 वनडे और दो टेस्ट मैच खेले हैं।  उन्होंने 50 ओवर के प्रारूप में 34 विकेट हासिल किए. पोवार ने नवंबर 2015 में क्रिकेट से संन्यास लिया था।

राष्‍ट्रपति कोविंद का ऑस्‍ट्रेलियाई उद्यमियों को आमंत्रण,राष्ट्रपति ने कहा ‘भारत की पिच आपके लिए तैयार है’

Ram Nath Kovind

नमस्कार दोस्तों,

भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ऑस्ट्रेलिया की अपनी यात्रा के दौरान बुधवार को भारतीय कारोबार की तुलना क्रिकेट के खेल से करते हुए स्‍थानीय उद्यमियों को भारतीय पिच पर अर्थात भारतीय बाज़ार पर तरने का आमंत्रण दिया. राष्‍ट्रपति ने उद्योगपतियों को इस मामले में अपने देश के क्रिकेट खिलाड़ियों से सीख लेने की सलाह दी. उन्होंने स्थानीय उद्यमियों से कहा कि ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों ने भारतीय पिच पर खूब सफलता हासिल की है. ‘‘आइए आप के लिए भी पिच तैयार है.’’
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच चल रही मौजूदा क्रिकेट सीरीज के बीच राष्ट्रपति कोविंद ने गुरुवार को अपने एक वक्तव्य में कहा कि दोनों ही देशों में क्रिकेट को लेकर काफी जूनून है. दोनों देशों के बीच मेलबर्न में दूसरे 20-ट्वेंटी मैच की पूर्व संध्या पर सिडनी में कारोबारी समुदाय को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि ‘‘भारत और ऑस्ट्रेलिया में क्रिकेट और कई अन्य चीजों को लेकर उत्साह लगभग एक जैसा है.’’
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ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्काट मॉरिसन की मौजूदगी में उन्होंने कहा, ‘‘सिवाय ऐसे मौकों के जब दोनों देशों की टीमें आपस में खेल रही हों, अधिकांश भारतीय क्रिकेट फैन्‍स के लिए ऑस्ट्रेलिया सबसे पसंदीदा टीम है. खासकर एशेज (इंग्लैंड-ऑस्ट्रेलिया टेस्ट) सीरीज के समय यह विशेष रूप से देखा गया है.’
राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि दोनों देश लोकतंत्र, बहुलवाद और मानवीय सम्मान के मूल्यों को समान रूप से महत्व देते हैं. राष्ट्रपति ने यह भी रेखांकित किया कि भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों मुक्त और खुले और नियम आधारित भारत-प्रशांत क्षेत्र की शांति और समृद्धि के लिये भी साझा विचार रखते हैं. स्पष्ट रूप से उनका इशारा चीन की ओर था जो क्षेत्र में अपना दबदबा बनाने के लिये ताकत का उपयोग कर रहा है.
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क्रिकेट के विषय पर लौटते हुए कोविंद ने कहा कि भारत में निवेश पर विचार कर रहे ऑस्ट्रेलियाई व्यापारियों और निवेशकों को भारतीय पिचों पर अपने क्रिकेटरों की सफलता से सीख लेनी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा, ‘‘… क्रिकेट जीवन के लिये अनुकरणीय है. मुझे लगता है कि यह व्यापार के लिये भी अनुकरणीय है. ऑस्ट्रेलियाई उद्योगपतियों तथा निवशकों को क्रिकेटरों के तौर-तरीकों से सीखने की जरूरत है.’’
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कोविंद ने कहा, ‘‘भारत में सर्वाधिक सफल ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज वे रहे हैं जिन्होंने अपना धैर्य दिखाया, स्थिति को सावधानीपूर्वक सम्हाला , लंबे समय तक टिके रहे , अपने साथी बल्लेबाज़ के साथ भरोसेमंद भागीदारी बनायी और स्पिन के चक्कर में नहीं फंसे.’’ उन्होंने कहा, ‘‘आप भारत आइये. पिच तैयार है.’’

कल दिखेका साल 2018 का सबसे बड़ा चन्द्रमा, दर्शन करने से माता लक्ष्मी होगी प्रशन्न।

कल दिखेगा साल का सबसे बड़ा चंद्रमा, दर्शन करने से मिलेगी सुख समृद्धि, लक्ष्मी होगी प्रसन्न

नमस्कार दोस्तों,

कल 23 नवंबर 2018: कार्तिक पूर्णिमा की रात पर इस साल का सबसे बड़ा चन्द्रमा दिखाई देगा।  पूर्णिमा पर कृतिका नक्षत्र में परिधि योग बनने से कार्तिक पूर्णिमा का महत्व कई गुना बढ़ गया है।  कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन गंगा नदी में स्नान करने का अलग महत्व है। माना जाता है की इस दिन गंगा में स्नान करने से पुरे साल स्नान करने के जितना पुण्य प्राप्त हो जाता है। कार्तिक पूर्णिमा पर कृतिका नक्षत्र और परिधि योग से छत्र योग बनेगा। इस योग में चन्द्रमा के दर्शन का काफी विशेष महत्व माना जाता है।

इस कार्तिक पूर्णिमा को जो चाँद निकलेगा वो साल का सबसे बड़ा चाँद होगा। इस दिन चन्द्रमा 180 अंश पर रहेगा। चन्द्रमा के उदय के समय छः कृतिकाओं शिवा, सम्भूति, संतति, अनुसुइया, प्राप्ति, एवं क्षमा का पूजन करने से शिव जी की कृपा की प्राप्ति होती है।

पंडितों और  ज्योतिषों  के अनुसार इस रात चाँद से निकलने वाली रौशनी अत्यधिक सकारात्मक ऊर्जा से भरी होती है। ये जातकों  के दिमाग पर काफी अच्छा असर डालती है। पूर्णिमा पर अपनी मानसिक ऊर्जा में वृद्धि करने के लिए चन्द्रमा को अर्ध्य देना चाहिए।  इस दिन सुख समृद्धि और संपत्ति पाने हेतु माता लक्ष्मी को प्रशन्न करने के लिए घर में पांच, ग्यारह या इक्कीस दिए जलाने चाहिए। इससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

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नदी के किनारे पड़े मिले मोदी जी के जन-धन खातों के एक ही बैंक के 350 ATM कार्ड

narendra modi jandhan yojna account holders atm card found near panam river in godhra gujarat, police investigating

 
 
नमस्कार दोस्तों,
गोधरा गुजरात के पंचमहाल जिले में रामपुर गांव के पास से होकर बहने वाली पानम नदी के किनारे प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत खुलवाए गए खातों से जुड़े 350 से अधिक बैंक एटीएम कार्ड बरामद किए गए हैं। पुलिस ने बताया कि पानम नदी के किनारे खेल रहे बच्चों से मिली सूचना पर ये कार्ड बरामद किए गए। इन पर जनधन योजना का प्रतीक चिन्ह बना हुआ है और इनपर खाताधारकों के नाम भी हैं। जानकारी मिलते ही स्थानीय बैंक के अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए।
 
 
नदी के किनारे पड़े मिले एटीएम कार्ड

 

 

गुरुवार को बैंक खुलने के बाद ही पता चल पायेगा कि कार्ड किन-किन लाभार्थियों के नाम से हैं और इसे नदी के किनारे क्यों फेंका गया? पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की कार्यवाही शुरू कर दी है। रामपुर गांव में पानम नदी के किनारे फेंके गए बैंक एटीएम कार्ड को पुलिस ने बरामद किया।
 
स्टेट बैंक के 300 से ज्यादा एटीएम कार्ड जब्त हुए हैं

बुधवार को यहां की पानम नदी से 350 से अधिक बैंक एटीएम कार्ड जब्त हुए हैं। ये सभी एटीएम कार्ड स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया के हैं। पुलिस मामला दर्ज कर आगे की छानबीन शुरू कर दी है।
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तीन बच्चों की माँ और भारत की शान महिला मुक्केबाज़ मैरीकॉम को सलाम।

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नमस्कार दोस्तों,

भारत की सबसे दिग्गज महिला मुक्केबाज़ मैरीकॉम ने  बोक्सिंग वर्ल्ड चैंपियनशिप के फाइनल में आठ साल बाद फिर अपनी जगह बना ली है।  दिल्ली में आयोजित इस वर्ल्ड चैंपियनशिप में पूरी दुनिया की निगाहें  भारत की सर्वश्रेष्ठ महिला मुक्केबाज़ मेरी कॉम पर टिकी हुई है। उम्मीद लगाया जा रहा है की शनिवार को होने वाले मुकाबले में गोल्ड जीतकर एकबार फिर भारत का नाम रौशन करेंगी. 48 किलोग्राम वर्ग के सेमीफइनल में उनका मुकाबला उत्तर कोरिया की कीम ह्यांग मी के साथ था। उन्होंने  बहुत ही कॉन्फिडेंस के साथ इस मुकाबले को खेला और जीत हासिल करके यह साबित  कर दिया की उन्हें मैग्निफिशेंट मैरी के नाम से यूँ ही नहीं बुलाया जाता।

अगर इस बार फिर मैरी कॉम इस वर्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर लाती हैं तो यह उनका लगातार छठा स्वर्ण पदक होगा.

एक निम्न आर्थिक स्थिति वाले मज़दूर परिवार में जन्मी मैरी कॉम के लिए उनकी कामयाबी तक का यह सफर आसान नहीं था. उन्होंने पग पग पर कड़ी चुनौतियों और हौसले को तोड़ देने वाली बड़ी बाधाओं  का डट कर सामना किया है। मेरी कॉम ने अपने  कामयाबी के रास्ते में आने वाली हर बाधा को लांघकर यह  साबित कर दिया की वो विलपॉवर  की एक बहोत बड़ी मिसाल हैं। यही वजह है की उन्हें आज पूरी दुनिया आयरन लेडी के नाम से जानती है. Image result for mairy com

हर जगह खुद को विजेता साबित किया

जब वो मुक्वेबाजी में आईं थीं तो इस खेल का कोई बड़ा भविष्य नहीं था और जोखिम का कोई  हिसाब नहीं था. घरवालों ने मना किया. खेल राजनीति ने रास्ता रोका. गरीबी और अभावों ने भी काफी मुश्किलें पैदा की -लेकिन क्या मजाल की मैरी कॉम का विश्वास डगमगा जाए . हर जगह उन्होंने खुद को विजेता साबित किया-चाहे ओलंपिक हो या एशियाई खेल या फिर विश्व बॉक्सिंग चैंपियनशिप।

बचपन मिट्टी की झोंपड़ी और मजदूरी में बीता

मैरी कॉम के अभिभावकों के पास एक मिट्टी की झोंपड़ी थी. उन्हें भी अपने बचपन में खेतों में मजदूर के तौर पर काम करना पड़ा. ये वो समय था जब उनके पास सपनों की उडाऩ के लिए पंख भले ही न रहे हों लेकिन उनके इरादे जरूर मजबूत थे. बचपन की कड़ी मेहनत ने उन्हें एक मजबूतपहचान दी. और बचपन के उसी मेहनत और मजबूत आत्मविश्वास के बदौलत अब उनकी जिंदगी पूरी तरह से बदल चुकी है.

मेरी कोम के पास सबकुछ है, आज भले ही उनकी परिस्थितियां बदल चुकी हैं लेकिन वो नहीं बदलीं हैं. जब भी घर में होती हैं तो खुद अपने पूरे घर को धोती हैं, सफाई करती हैं, खाना बनाती हैं, वह अपने तीन बेटों की प्यारी मम्मी बन जाती हैं।  मैरी कॉम अपने खाली समय में वो सारा काम करती हैं जो की एक आम घरेलु महिला करती हैं।

फीस नहीं होती थी स्कूल की

कई बार ऐसा होता था जब मैरी कॉम के पिता उनकी स्कूल की फीस भी जमा नहीं कर पाते थे जिस वजह से  उन्हें क्लास के बाहर खड़ा कर दिया जाता था। मेरी ने अपनी आत्मकथा अनब्रेकेबल में लिखा है, गांव में शायद सभी बच्चे उतनी मेहनत नहीं करते थे, जितनी हम लोग. मैं खेतों में पिता के साथ काम में मदद करती रहती थी. और अपने साथियों को दुूर से खेलते हुए देखती थी. अक्सर मुझे बैलों को लेकर खेत में बुआई का काम करना पड़ता था। ये बहुत मुश्किल होता था क्योंकि बैलों को भी नियंत्रित करते हुए चलाना होता था और साथ साथ बुआई भी करनी होती थी।
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जाड़े में कपड़े नहीं होते थे

खेतों में काम करने के साथ मेरी गायों को चरातीं, दूध दूहती
. कभी मायूस भी होतीं कि वह बच्चों के साथ खेल क्यों नहीं पा रहीं।  मेरी के परिवार के दिन तब इतने कठिन थे कि कई बार तो कोई उम्मीद की किरण ही नजर नहीं आती थी।  लगता था कि ये अंतहीन सिलसिला कब तक चलता रहेगा।  पढाई लैंप की रोशनी में होती थी। पहनने के लिए नाममात्र के कपड़े होते थे।  जाड़े हमेशा उनके कठिन होते थे, जो रातों में सोने के दौरान उन्हें कंपकंपाते रहते थे।

पहली बार कब पदक जीता

गांव के पास के कस्बे में जब उन्होंने स्कूल की पढाई पूरी कर ली तो वह आगे की पढाई के लिए इंफाल गईं. यहीं उन्होंने पहली बार सही तरीके से बॉक्सिंग सीखना शुरू किया. वह स्कूल जातीं, लेकिन साथ में सुबह भारतीय खेल प्राधिकरण की बॉक्सिंग एकेडमी जातीं, प्रैक्टिस करतीं और लौटकर खाना बनातीं थीं.

उनको देखकर लोगों को लगता था कि उनकी जैसी एक दुबली पतली लड़की बॉक्सर कैसे बन सकती है।  पहली बार उन्हें एक राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में 48 किलोवर्ग में हिस्सा लेने का मौका मिला।  जब वह रिंग में उतरीं तो उन्होंने अपने प्रतिद्वंदी खिलाडियों को बुरी तरह हराया।

उनके मुक्कों में इतना दम था कि कोई भी उनके सामने टिक नहीं पाया।  उन्होंने न केवल गोल्ड जीता बल्कि वह प्रतियोगिता की श्रेष्ठ बाक्सर भी चुनी गईं।  वर्ष 2001 में पहली नेशनल वूमन बॉक्सिंग चैंपियनशिप चेन्नई में आयोजित की गई थी।  मेरी का चयन मणिपुर की टीम में 48 किलोवर्ग टीम में हुआ।  अभ्यास शिविर बेंगलूर में था।  ट्रेन में रिजर्वेशन मिला नहीं, लिहाजा टीम को ट्रेन के डिब्बे में टायलेट के पास बैठकर जाना पड़ा।  चेन्नई में भी मेरी ने गोल्ड मेडल जीता।

गुरुनानक साहब के इन नौ उपदेशों को अपने जीवन में धारण करने से दूर रहती है हर मुसीबत।

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इक ओंकार मंत्र से नानक ने दिया ये संदेश 

अपने इस मंत्र से गुरु नानक ने लोगों को ईश्वर के एक होने का संदेश दिया। उनका कहना था कि ईश्वर सब जगह मौजूद है। वह हमारा पिता है इसलिए सबको प्रेम के साथ रहना चाहिए। 
धन कैसे कमाएं

लोभ को त्याग कर व्यक्ति को खुद बहुत मेहनत करके सही तरीके से धन अर्जित करना चाहिए। 
 
हक नहीं छीनना चाहिए

नानक कहते थे कभी भी किसी का हक नहीं छीनना चाहिए। इसके विपरीत कड़ी मेहनत और ईमानदारी के साथ की हुई कमाई से जरूरतमंदों की भी मदद करनी चाहिए।   
 
पैसों को इस जगह बिल्कुल ना रखें

नानक कहते हैं कि धन को हमेशा अपनी जेब तक ही सीमित रखें। उसे कभी भी अपने दिल में जगह नहीं देनी चाहिए। ऐसा ना करने पर व्यक्ति को हमेशा नुकसान ही उठाना पड़ता है। 
 
स्त्रियों के बारे में ये कहना था नानक का

नानक हमेशा स्त्रियों का आदर करने की सलाह देते रहे। उनके अनुसार स्त्रीपुरुष सभी एक समान थे। 
 
काम कैसे करना चाहिए

नानक के अनुसार व्यक्ति को हमेशा तनावमुक्त रहकर निरंतर अपने कर्म करते रहने चाहिए। ऐसा करने से वह हमेशा प्रसन्न बना रहता है।
 
दुनिया को जीतने का मंत्र

नानक कहते थे कि दुनिया को जीतने से पहले व्यक्ति को अपने विकारों और बुराईयों पर विजय पाना बेहद जरूरी है। तभी वह दुनिया को जीत सकता है। 
 
शत्रु पर विजय पाने का मंत्र

अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन होता है। नानक कहते थे इसलिए व्यक्ति को कभी भी अहंकार नहीं करना चाहिए। सब लोगों से विनम्र होकर बात करनी चाहिए। 
 
जातिवाद को मिटाने पर जोर

गुरु नानक देव ने हमेशा अपने प्रवचनों से जातिवाद को मिटाने के उपदेश दिए हैं। इसके अलावा उन्होंने अपने विचारों में हमेशा लोगों को सत्य के मार्ग पर चलने की सीख दी है। 
 
जिस किसी ने भी गुरुनानक जी के इन उपदेशों को अपने जीवन में उतार लिया वो अपने जीवन में आने वाली हर मुसीबत से आसानी से अपनी बुद्धि के दम पर  खुद ही निपट लेने में सक्षम हो जाता है। गुरुनानक बताये मार्गदर्शन में चलने वाला मनुष्य अपने जीवन पथ से कभी नहीं भटकता और अपनी मंज़िल को ज़रूर प्राप्त करता है।