10 दिसंबर 2018 मानवाधिकार दिवस। जानिये अपने सभी जरुरी मौलिक अधिकारों के बारे में।

 Human Rights Day 2018 / जानिए क्या हैं आपके मुख्य मानवाधिकार, जो आपके लिए हैं बेहद जरूरी

 
 
 

10 दिसंबर 2018 सोमवार को ‘अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस’ यानी International Human Rights Day के रूप में पूरे विश्व में मनाया जाएगा।

अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस, विश्व के सभी मानव के अधिकारों को पहचान देने और हर मनुष्य को उनके मौलिक अधिकारों के प्रति जागरूक बनाने के लिए प्रति वर्ष 10 नवंबर को मानवाधिकार दिवस के रूप में मनाया जाता है। 

 

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अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस के दिन दुनियाभर में मानव अधिकारों के हनन को रोकने और उनके बारे में जागरूकता फैलाने के लिए कई तरह के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। ताकि हर इंसान अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो और अपने अधिकारों की रक्षा करते हुए एक सम्मानित जीवन जी सकें।

 

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जानें क्या हैं मुख्य मानवाधिकार

मालूम हो की मानव अधिकार का मतलब उन मूल अधिकारों से है जो सभी को समान रुप से जीवन जीने, स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और एक समान सम्मानजनक व्यवहार की प्राप्ति का अधिकार प्रदान करता है। 

कुछ ऐसे मौलिक अधिकार है जिसका ज्ञान हर व्यक्ति को होना अत्यंत आवश्यक हैं। यह नियम कानून युद्ध बंदियों, कैदियों से लेकर सामान्य नागरिकों तक सभी के लिए एक सामान बनाए गए हैं।

 

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* बोलने की आजादी

* आजादी और सुरक्षा का अधिकार

* आर्थिक शोषण के खिलाफ आजाव उठाने का अधिकार

* रंग, नस्ल, भाषा, धर्म के आधार पर समानता का अधिकार

* कानून के सामने समानता का अधिकार

* कानून के सामने अपना पक्ष रखने का अधिकार

* अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार

 

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ये ऐसे मुलभुत अधिकार हैं जिनकी जानकारी न होने पर मनुष्य को कई बार शोषण और अपमान का सामना करना पड़ सकता है. इन अधिकारों की जानकारी से आप अपने अधिकारों की रक्षा करते हुए एक बेहतर व्यक्तित्व की रचना कर सकते हैं.

ऑस्ट्रेलिया टेस्ट में भारतीय टीम हो रही गलत अम्पायरिंग का शिकार

 

india vs australia

नमस्कार दोस्तों,

आज ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच एडिलेड में चल रहे पहले टेस्ट मैच में भारतीय टीम अपनी जीत से छह विकेट दूर है। टीम इंडिया को इस मुकाबले में अपनी जीत हासिल करने के लिए हर हाल में  मैच के आखरी दिन ऑस्ट्रेलिया के छह विकेट गिराने होंगे। वैसे मैच की ताज़ा स्थिति को देखते हुए यह काम भारतीय टीम के लिए ज्यादा मुश्किल नहीं लगती। मैच में लगातार हो रहे ख़राब अम्पायरिंग के बावजूद टीम इंडिया काफी मज़बूत बनी हुई है। 

भारत और ऑस्ट्रेलिया के मध्य एडिलेड में खेले जा रहे पहले टेस्ट मैच में टीम इंडिया को कई बार ख़राब अम्पायरिंग का सामना करना पड़ा। अम्पायर नाइजल लॉन्ग ने ख़राब अम्पायरिंग करते हुए कई बार गलत निर्णय सुनाया। उनकी अम्पायरिंग की हर कोई आलोचना कर रहा है। आज मैच के चौथे दिन भी उनके निर्णय पर सवाल उठाये गए।  इससे पहले भी तीसरे दिन के खेल में नैजल ने दो बार गलत निर्णय दिया था। 

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डेटा स्टोर करने की पारम्परिक पद्धतियों की छमताएँ काफी सीमित है जबकि ब्लॉकचैन की छमताएँ असीमीत। अगर किसी हैकर ने किसी स्टोरेज ऑथॉरटी की साइट हैक कर डाटा में कुछ फेरबदल कर दिया या डाटा नष्ट कर दिया तो उस डाटा पर निर्भर रहने वाले सारे काम काज पूरी तरह से ठप्प हो जाएंगे। ऐसी घटना कुछ बड़े स्तर पर आई प्राकृतिक आपदा की वजह से भी हो सकता है पर ब्लॉकचैन इन समस्याओं से पूरी तरह से सुरक्षित है।

 

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पिछले पांच नवंबर को पहली बार रिलायंस कंपनी को ब्लॉकचैन के माध्यम से पेमेंट किया गया। वैसे अभी भारत में ब्लॉकचेन पर आधारित वर्चुअल करंसीज पर पूरी तरह से प्रतिबन्ध है, पर फिर भी इस तकनीक में कई उद्योगों में बड़े बदलाव की छमता है। 

आइये जानते हैं की ब्लॉकचैन क्या है, इसमें निवेश करना कितना सुरक्षित है और इसका भविष्य क्या हो सकता है. 

क्या ब्लॉकचेन का बिटकॉइन से कुछ लेना-देना है? 

जब बिटकॉइन की शुरुआत हुई तो ब्लॉकचैन का ही उपयोग बिटकॉइन के सभी लेनदेन को स्टोर करने वाले डेटाबेस के रूप में किया जाता था इसलिये यह कहना गलत नहीं होगा की ब्लॉकचैन ही बिटकॉइन की पहली कड़ी है। ब्लॉकचैन के बिना बिटकॉइन को समझा नहीं किया जा सकता। 

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इसे ब्लॉकचेन क्यों कहते हैं? 

बिटकॉइन की मूल दस्तावेजों में ब्लॉगकचैन का जिक्र नहीं है क्योंकि वर्चुअल करेंसी के नए डेटाबेस को परिभाषित करने के लिए ब्लॉकचैन शब्द का प्रयोग नहीं किया गया था। पर बाद में इसे ब्लॉकचेन का नाम दिया गया क्योंकि नेटवर्क पर आने वाले सभी ट्रांसक्शन को ब्लॉक्स में बांटने के बाद बेहद परिष्कृत गणित के जरिए सरे ब्लॉक्स को एक साथ जोड़ा जाता है जिस वजह से इसका वापिस जाना संभव नहीं रहता। साथ ही पुराने डाटा में किसी प्रकार की फेरबदल की कोई गुंजाइश नहीं रहती। 

अन्य ट्रांजैक्शन डेटाबेस की तुलना में अलग कैसे है ब्लॉकचेन? 

आर्थिक अभिलेखों की संग्रह के इस्तेमाल में आने वाले अधिकतर डेटाबेस की सुरक्षा निगरानी एक केंद्रीय संस्था द्वारा की जाती है। मसलन, बैंक अपने सभी ग्राहकों के खातों के धन की निगरानी के लिए जिम्मेदार है। बिटकॉइन के ब्लॉकचेन डेटाबेस में खाता रखा जाता है और बिटकॉइन नेटवर्क से जुड़े सभी कंप्यूटरों द्वारा इसे अपडेट किया जाता है। 

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बिटकॉइन की साझेदारी वाली प्रकृति वर्चुअल करंसी के लिए उपयोगी होती है क्योंकि इसे तैयार करने वाले संतोषी नाकामातो ये नहीं चाहते थे कि किसी एक सेंट्रल अथॉरिटी के दम पर वर्चुअल करंसी क्रिएट की जाए। चूंकि रेकॉर्ड्स का संग्रह सामुदायिक स्तर पर किया जाता है, इसलिए इस पर किसी एक कंप्यूटर या संस्था का व्यक्तिगत अधिकार नहीं होता। अगर इसे रखने वाला कोई एक कंप्यूटर हैक कर भी लिया गया या ऑफलाइन मोड में इससे छेड़छाड़ की गई तो दूसरे कंप्यूटर्स काम करते रहते हैं। 

क्या सभी ब्लॉकचेन प्रॉजेक्ट्स किसी-न-किसी रूप में बिटकॉइन से जुड़े होते हैं? 

नहीं। अधिकतर ब्लॉकचैन ऐसे हैं जिनका बिटकॉइन से कोई सम्बन्ध नहीं। सुरुवाती वर्षों में ब्लॉकचैन से बिटकॉइन का संचालन होने के बाद कुछ लोगों ने सोचा की बिटकॉइन ब्लॉकचेन की प्रणाली को उन खातों को भी सुरक्षित किया जा सकता है जिनका की बिटकॉइन से कोई सम्बन्ध नहीं है। 

क्या ब्लॉकचेन का इस्तेमाल सिर्फ वर्चुअल करंसी ट्रांजैक्शन का रेकॉर्ड रखने के लिए ही होता है? 

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नहीं। बिटकॉइन ब्लॉकचेन की नकल करने के अब तक कई प्रयाश हो चुके हैं। ज्यादातर शुरुआती प्रयास प्रोग्रामिंग के उन एक्सपर्ट्स ने किया है जो कि बिटकॉइन से थोड़े अलग फीचर की वर्चुअल करंसीज तैयार करना चाहते थे। समय के साथ-साथ, कुछ नई वर्चुअल करसंजी में बहोत से नए और महत्वपूर्ण छमताएँ जोड़े गए जिसने ब्लॉकचेन की प्रणाली को एक नया दृष्टिकोण दिया ताकि यह कुछ और ज्यादा प्रकार की सूचनाओं को हैंडल कर सके। 

बीते समय के साथ अब कई कंपनियों और सरकारों ने वैसे डेटा स्टोर करने के लिए ब्लॉकचेन्स का इस्तेमाल करने की इच्छा जताई, जिनका किसी भी प्रकार के लेनदेन से कोई मतलब नहीं है। एक ओर बैंक विभिन्न अकाउंट्स के बीच पेमेंट्स पर नजर रखने के लिए ब्लॉकचेन्स बना रहे हैं तो दूसरी ओर सरकारें ब्लॉकचेन के इस्तेमाल से प्रॉपर्टी रेकॉर्ड्स और वोटों को स्टोर करने के लिए प्रयोग कर रही हैं। 

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क्या कोई भी व्यक्ति ब्लॉकचेन से जुड़ सकता है और इसके रेकॉर्ड्स अपडेट कर सकता है? 

ज्यादातर बड़ी वर्चुअल करंसीज के साथ कोई भी जुड़ सकता है, इसे देख सकता है और इसके रेकॉर्ड्स मेनटेन करने में मदद कर सकता है। इन्हें पब्लिक ब्लॉकचेन्स कहा जाता है। इस सिस्टम ने तकनीक पर नजर रखने वाले कई बड़े प्लेयर्स को असहज कर दिया। इस वजह से ज्यादातर कॉर्पोरेशनों एवं सरकारों ने प्राइवेट ब्लॉकचेन के साथ हाथ मिलाए जो सिर्फ अप्रूव्ड कंप्यूटरों को ही आंकड़े देखने और इनसे जुड़ने की अनुमति देते हैं। 

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बिटकॉइन की चोरी की घटनाओं से यह पता नहीं चलता है कि ब्लॉकचेन सुरक्षित नहीं हैं? 

वर्चुअल करंसीज की अधिकतर चोरियां इनके पासवर्ड या प्राइवेट की के चोरी या हैक हो जाने के कारण होते हैं। वर्चुअल करंसीज इस तरह की चोरियों की चपेट में आ सकती हैं क्योंकि अगर हैकर वॉलिट से पैसे निकाल लेता है तो इसे वापस वॉलिट में लाने वाली कोई सेंट्रल अथॉरिटी नहीं होती है। चूंकि प्राइवेट की सुरक्षा के लिहाज से भेद्य हैं, इसलिए ब्लॉकचेन हैकरों के हमले के खिलाफ आम तौर पर ज्यादा सुरक्षित हैं। चूंकि ब्लॉकचेन की टेक्नॉलजी में कई ब्लॉक्स के समूह को सामुदायिक रूप से बांटा जाता है, इसलिए किसी के द्वारा पुराने रेकॉर्ड्स में छेड़छाड़ संभव होता है। 

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क्या सच में ब्लॉकचेन, डेटा स्टोर करने की पुरानी पद्धतियों से बेहतर है? 

ऐसा कहना गलत है. वर्चुअल करंसीजके उपयोग से पता चल चुका है कि ब्लॉकचेन्स कुछ स्तर पर काम कर सकते हैं, लेकिन उनके अपनी समस्याएं हैं। चूंकि नेटवर्क से जुड़े सभी कंप्यूटरों में हरेक ट्रांजैक्शन का रेकॉर्ड रहता है, इसलिए ब्लॉकचेन्स की डेटा प्रोसेसिंग की क्षमता सीमित हो जाती है। ब्लॉकचेन डिजाइन के कई आलोचकों का कहना है कि डेटा को सामुदायिक स्तर पर रखने को लेकर विभिन्न प्रकार की समस्याओं के कारण ब्लॉकचेन एक बेहतर विकल्प साबित नहीं हो सकता।