नेता प्रतिपक्ष के लिए भारतीय जनता पार्टी ने बृजमोहन अग्रवाल को किया आगे।

छत्तीसगढ़ में हार के बाद अब नेता प्रतिपक्ष पर बीजेपी में मंथन, बृजमोहन अग्रवाल रेस में आगे

नमस्कार दोस्तों,

पांच राज्यों में हुए विधान सभा चुनाव में छत्तीसगढ़ सही अन्य राज्यों में मिली करारी हार के बाद भारतीय जनता पार्टी ने अब  2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव की रणनीतियों पर काम करना शुरू कर दिया है. भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल को पार्टी की तरफ से विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष घोषित किया जा सकता है. हालांकि, यह बात भी सामने आ रहा है कि यह इस बात पर ज्यादा निर्भर करेगा कि कांग्रेस  छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के तौर पर किसे चुनती है. माना जा रहा है कि नेता विपक्ष के नेता के तौर पर अभी से ही भाजपा में मंथन शुरू हो चूका है.

सरकार बनने से पहले ही कांग्रेस ने शुरू कि किसानों की कर्ज माफी की तैयारी.

ऐसे कयास लगाए जा रहे है कि विपक्ष के नेता के लिए बीजेपी ओबीसी कार्ड आजमाएगी और ऐसी स्थिति में कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ही सबसे मजबूत दावेदारी रखते हैं. माना जा रहा है कि पूर्व सीएम रमन सिंह को विपक्ष का नेता नहीं बनाया जाएगा. बीजेपी मुख्यालय से ऐसी खबर आ रही है कि उन्हें देश की राजनीति में लाया जाएगा और 2019 के लिए पार्टी में उनकी अहम भूमिका होगी. 

आपको यह भी बता दें कि बृजमोहन अग्रवाल, छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर सिटी के साउथ से जीते हैं. उन्होंने अपने प्रतिद्वंदी कांग्रेस के कन्हैया अग्रवाल को तकरीबन 17 हजार वोटों से हराया है. दरअसल, छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को 65 सीटें मिली हैं जबकि बीजेपी को केवल 15 सीटें मिली हैं. छत्तीसगढ़ में पिछले 15 साल से रमन सरकार का शासन था. 

वहीँ गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने छत्तीसगढ़ व राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी के पिछड़ने पर भले ही कोई भी बात नहीं कही, लेकिन उन्होंने तेलंगाना में हुए  महागठबंधन को पूरी तरह विफल बताया. तेलंगाना राष्ट्र समिति ने बहुमत हासिल कर लिया है. अब जब तेलंगाना में टीआरएस पार्टी की सरकार बननी तय  है तो दूसरे नंबर की पार्टी कांग्रेस विपक्ष दल होगी.

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सरकार बनने से पहले ही कांग्रेस ने शुरू कि किसानों की कर्ज माफी की तैयारी.

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नमस्कार दोस्तों,

रायपुर : छत्तीसगढ़ में 15 सालों तक सत्ता विहीन रहने के बाद, 15 वर्ष बाद मिले पूर्ण महूमत से कांग्रेस  पार्टी का आत्मविश्वास चरम पर है। पर यह जनता के लिए गर्व की बात है की जित की खुसी में कांग्रेस मोदी सरकार की तरह अपना वादा नहीं भूली। कांग्रेस ने विधान सभा चुनाव से पूर्व छत्तीसगढ़ की जनता से यह वादा किया था की यदि उनकी सरकार बनती है तो वे सत्ता में आते ही सबसे पहले छत्तीसगढ़ के किसानों की क़र्ज़ माफ़ी के लिए कार्य करेंगे। 

जानकारी मिल रही है की छत्तीसगढ़ में पूर्ण बहुमत से जीत मिलने के बाद राज्य शासन के अधिकारियों ने किसानों की कर्ज माफी की तैयारियां शुरू कर दी हैं. राज्य सरकार के अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार सहकारिता विभाग के उप सचिव श्री पीएस सर्पराज ने संचालक, संस्थागत वित्त संयोजक, राज्य स्तरीय बैंकर्स कमेटी और प्रबंध संचालक छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक को एक पत्र लिखकर किसानों की ऋण माफी योजना को लागू करने के लिए सभी अहम जानकारी मांगी है.

 

पत्र में लिखा गया है कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा अपने जन घोषणा पत्र में सरकार बनने के 10 दिनों के भीतर किसानों का कर्ज माफ करने की घोषणा की गई है. इस घोषणा की पूर्ति के लिए किसानों की ऋण माफी योजना तैयार किया जाना है. अधिकारियों से कहा गया है कि उनके अधीन कार्यरत बैंकों द्वारा किसानों को वितरित कृषि ऋण और बकाया राशि की पूरी जानकारी 30 नवंबर की स्थिति के अनुसार उपलब्ध करने की मांग की है। 

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राज्य में विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने अपनी सरकार बनने पर किसानों का ऋण माफ किए जाने का वादा किया था. वहीं कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा था कि सरकार बनने के 10 दिनों के भीतर किसानों का कर्ज माफ किया जाएगा. कांग्रेस ने इसके साथ ही धान का समर्थन मूल्य 25 सौ रूपए प्रति क्विंटल करने का भी वादा किया था। 

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में 90 सीटों में से कांग्रेस ने 68 सीटों पर पूर्ण बहुमत से जीत हासिल की है जबकि भारतीय जनता पार्टी को केवल 15 सीटों पर जीत मिली है. जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ को पांच सीटें तथा बहुजन समाज पार्टी को केवल दो ही सीटों पर जीत हासिल हुई है।  राज्य में 15 वर्षों के बाद कांग्रेस एक बार फिर सत्ता में आ रही है. 

वनडे और टेस्ट क्रिकेट में बनने वाले बेहतरीन रिकार्ड्स और उससे जुड़ी यादें।

Sachin and Muralitharanनमस्कार दोस्तों ,



दोस्तों, यदि मैं क्रिकेट को इंसानों का सबसे पसंदीदा खेल कहूं तो मै समझता हूँ की मेरा ऐसा कहना गलत नहीं होगा। यूँ तो इंसान अपने जीवन में रोमांच भरने के लिए कई खेल खेलता है पर क्रिकेट ही एक मात्रा ऐसा खेल है जिसमे खेलने वाले व्यक्ति से देखने वाला ज्यादा रोमांच का अनुभव करता है। 


आंकड़ों से सम्बंधित  इस खेल में इसके प्रारम्भ से लेकर अब तक कई रिकार्ड्स बनते और टूटते चले आ रहे हैं। दोस्तों क्रिकेट के खेल में रिकार्ड्स का बनना और टूटना बहोत ही आम बात है पर इस खेल में अब तक कुछ ऐसे रिकार्ड्स भी बन चुके हैं जिसे कभी तोडा ही नहीं जा सकता और न ही इन रिकार्ड्स को बनाने वाले  खिलाडी को कभी भुलाया जा सकता है। आइए जानते हैं  क्रिकेट के 10 ऐसे रिकार्ड्स और इन रिकार्ड्स को बनाने वाले के बारे में जिसे भविष्य में भी कभी कोई खिलाडी तोड़ नहीं सकता… … ….. …. 

जानिये कांग्रेस की उम्मीद और सबसे युवा नेता सचिन पायलट के बारे में।

1. डॉन ब्रैडमैन : टेस्ट में 99.94 की औसत बल्लेबाजी 

आज से 67 साल पहले ही डॉन ब्रैडमैन ने टेस्ट क्रिकेट से सन्यास ले लिया है, लेकिन टेस्ट क्रिकेट में औसत बल्लेबाजी  का उनका रिकॉर्ड आज तक न तो कोई तोड़ पाया है और न ही भविष्य में इस रिकॉर्ड को तोड़ पाने की कोई सम्भावना है। डॉन ब्रैडमैन ने 99.94 की औसत से रन बटोरे हैं, डॉन ब्रैडमेन के बाद सबसे अच्छी औसत बल्लेबाजी की लिस्ट में जो दूसरा बल्लेबाज है उनका नाम ग्रीम पोलाक है।  दक्ष‍िण अफ्रीका के ग्रीम पोलाक की औसत बल्लेबाज़ी 60.97 है। 

2. सचिन तेंदुलकर : वनडे क्रिकेट में सर्वाधिक 18426 रन 

क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर का वनडे क्रिकेट में सबसे अधिक 18426 रन बनाने का रिकॉर्ड तोड़ना भी अब तक किसी के लिए संभव नहीं हो सका है।इस लिस्ट में सचिन से नीचे जो बल्लेबाज हैं, वो सभी वनडे क्रिकेट से बहोत पहले ही संन्यास ले चुके हैं.

3. मुथैया मुरलीधरन : 1347 विकेट लेने वाले एक मात्र गेंदबाज़। 

इंटरनेशनल क्रिकेट में अब तक केवल दो ही गेंदबाज ऐसे हैं जिन्होंने अपनी गेंदबाज़ी से 1000 से अधिक विकेट उड़ाए  हैं. पहले पायदान पर हैं मुथैया मुरलीधरन और दूसरे पर शेन वॉर्न का नाम दर्ज़ है. मुरलीधरण ने 1347 विकेट लिए, जबकि शेनवॉर्न 1001 पर ही ठहर गए और इससे आगे नहीं बढ़ पाए। मुरली का रिकॉर्ड तोड़ने की बात तो दूर, अब तो कोई गेंदबाज इंटरनेशनल क्रिकेट में  न तो इतना लम्बा  खेलता  है और न ही 1000 विकेट लेने के बारे में सोचता है.

4. जैक होब्स: फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 61760 रन

इंग्लैंड के सर जैक होब्स ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में बल्लेबाजी की जो क्लास दिखाई, आज की क्रिकेट में कोई भी खिलाडी उसके आसपास तक भी नहीं पहुंच पाया और नहीं कोई खिलाडी इस आंकड़े के करीब तक पहुंचने के बारे में सोचता है। आपको शायद यह जानकर हैरानी होगी कि सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, सुनील गावस्कर, रिकी पोटिंग और ब्रायन लारा जैसे बल्लेबाज़ों का फर्स्ट क्लास क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले टॉप 10 खिलाडियों की लिस्ट में नाम तक नहीं है। 

5. जिम लेकर: एक ही टेस्ट में 19 विकेट लिए। 

इंग्लैंड के जिम लेकर ने 1956 में इंग्लैंड के खिलाफ एक टेस्ट में 19 विकेट लेने का जो रिकॉर्ड बनाया था, उसे इतने सालों में तोड़ना तो दूर, इस रिकॉर्ड की कोई बराबरी भी नहीं कर पाया. और इस रिकॉर्ड को तोड़ पाना पूरी तरह से नामुनकिन भी है क्योंकि जो ये रिकॉर्ड तोड़ेगा, उस गेंदबाज को टेस्ट मैच की दोनों पारियों में सभी 20 विकेट लेने होंगे. जो असंभव सा है।  

6. ग्राहम गूच: एक टेस्ट में 456 रन बनाये। 

ग्राहम गूच ने यह रिकॉर्ड टीम इंडिया के खिलाफ साल 1990 में बनाया था. उन्होंने खेल की पहली पारी में 333 रन  बनाये और दूसरी में 123 रन. इस तरह उन्होंने एक ही टेस्ट में 456 रन बनाने का अद्भुत रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। उसके बाद ब्रायन लारा ने एक ही पारी में 400 रन बनाने का रिकॉर्ड भी बना दिया, लेकिन न तो लारा और न ही कोई दूसरा ऐसा बल्लेबाज़ हुआ जो की ग्राहम गूच के इस रिकॉर्ड को तोड़ सके।

7. विल्फ्रेड रोड्स: फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 4204 विकेट

शायद आपको यह जानकर हैरानी होगी कि इंग्लैंड के दिग्गज क्रिकेटर विल्फ्रेड रोडस ने  कुल 1110 फर्स्ट क्लास मैच खेले थे। फर्स्ट क्लास क्रिकेट में उन्होंने 4 हजार विकेटों का आंकड़ा पार किया और ऐसा करने वाले दुनिया के अकेले क्रिकेटर बन गए। पिछले तीस सालों में कोई गेंदबाज टॉप 25 फर्स्ट क्लास बॉलरों की सूची में भी अपनी जगह नहीं बना पाया तो फिर इस रिकॉर्ड का टूटना तो बहुत दूर की बात है.

8. चामिंडा वास : एक वनडे मैच में लिए 8 विकेट

श्रीलंका के खब्बू गेंदबाज के नाम से मशहूर चामिंडा वास ने 2001 में सिर्फ 19 रन देकर अकेले ही 8 विकेट लिए थे. आज तक उनके रिकॉर्ड का कोई भी गेंदबाज़ बराबरी नहीं कर पाया है। 

9. क्रिस गेल: 30 गेंदों में शतक 

क्रिस गेल ने दो साल पहले आईपीएल में महज 30 गेंदों में शतक ठोककर टी 20 का सबसे तेज गति से शतक बनाया था और ऐसा करने वाले टेस्ट मैच के पहले बल्लेबाज़ के तौर पर यह रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया था।  गेल का यह रिकॉर्ड तोड़ने के लिए बल्लेबाज़ को हर गेंद पर तीन रन से ज्यादा की औसत से रन बनाने होंगे. ऐसे में इस रिकॉर्ड के टूटने के बारे में  कोई खिलाडी सोचता भी नहीं है। 

10. फिल सिमंस: 10 ओवर में 3 रन

वनडे क्रिकेट में 0.3 की इकॉनोमी. यह सबसे दमदार गेंदबाज़ी का बेतोड़ उदाहरण है। शायद आप यह पढ़ कर चौक गए होंगे पर यह सच है। वेस्टइंडीज के फिल सिमंस ने  23 साल पहले पाकिस्तान के खिलाफ खेले गए मैच में यह कारनामा कर दिखाया है. सिमंस ने सिडनी में खेले गए इस वनडे मैच में 10 ओवर में 8 मेडेन के साथ सिर्फ 3 रन दिए थे और पाकिस्तान के 4 विकेट चटखाये थे।

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जानिये कांग्रेस की उम्मीद और सबसे युवा नेता सचिन पायलट के बारे में।

Image result for sachin pilotनमस्कार दोस्तों,

लगातार मिल रही हार और गिरती लोकप्रियता से क्रैश लैंडिंग कर रहे कांग्रेस नुमा जहाज को गिरने से बचाने और सफलता की ऊंचाई पर एक नई उड़ान भरने के लिए तैयार करने वाले सचिन पायलट के लिए ऐसा कर पाना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं। लेकिन अपने शांत स्वाभाव के लिए जाने जाने वाले यह युवा नेता, पार्टी के अंदर चल रहे इन अंतर्विरोधों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।

सचिन पायलट का जन्म उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में हुआ और वे नोएडा के वैदपुरा गांव के निवासी हैं। पायलट को राजनीति अपने पिता से विरासत में मिली है. उनके पिता राजेश पायलट पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के बेहद करीबी नेता और एक केंद्रीय मंत्री थे, जबकि सचिन अब कांग्रेस की ओर से प्रधानमंत्री पद के स्वाभाविक उम्मीदवार राहुल गांधी के सबसे विश्वास पात्र हैं।

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आइये जानते हैं सचिन पायलट के जीवन से जुड़ी  कुछ निजी बातें और समझते हैं इस युवा के व्यक्तित्व को….

सचिन पायलट अपने काम में किसी भी प्रकार की देरी बिलकुल भी पसंद नहीं करते. नए विचारों को खुले मन से सुनने और समझने की क़ाबलियत रखने वाले कॉर्पोरेट मामलों के केंद्रीय मंत्री और राजस्थान प्रदेश कांग्रेस के नवनियुक्त अध्यक्ष हैं सचिन पायलट। सचिन अगर कुछ करने की ठान लेते हैं तो उन्हें डिगाना बहोत ही कठिन कार्य हो जाता है।  केंद्र में पहली बार संचार राज्यमंत्री का कार्यभार संभालने वाले पायलट के सामने एक दिलचस्प वाकया सामने  आया जब वे अरुणाचल प्रदेश के तवांग दौरे पर थे. इस घटना ने उन्हें नौकरशाही के दावपेच से निकलकर लोगों से काम कराने का हुनर सीखा गया। 

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बात तब की है जब सचिन पायलट, सीमा सुरक्षा बल के जवानों को सैटेलाइट फोन बांटने गए थे. सैटेलाइट फोन लेते वक्त एक जवान ने उनसे  कहा, ”सर थैंक्यू वेरी मच. लेकिन यह हम लोगों को बहुत ही महंगा पड़ता है.” उस जवान ने बताया कि केवल एक मिनट बात करने के 50 रु. देने पड़ते हैं. यह सुनकर सचिन के मन में सवाल उठा कि दिल्ली में बैठकर आम लोग एक मिनट के लिए केवल चवन्नी देते हैं और 10,000 रु. महीने तनख्वाह पाने वाला सीमा पर तैनात जवान जो बर्फ में खड़े होकर गोलियां खा रहा है, उसे अपने घर बात करने के लिए 50 रु. प्रति मिनट देने पड़ रहे हैं जो की गलत है। 

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दिल्ली पहुंचकर पायलट ने अधिकारियों को इस दर में कटौती के आदेश दिए. लेकिन पायलट बताते हैं, ”अधिकारी फाइल को इधर-उधर घुमाते हुए नखरे दिखाने लगे तब मैंने फौरन तत्कालीन गृह मंत्री पी. चिदंबरम से मिलकर लिखित मंजूरी ले ली. फिर भी अधिकारी काम करके नहीं दे रहे थे. और आदतन काम को ताल रहे थे।”

यह पायलट की कोशिशों का ही नतीजा है की 50 रु. की कॉल दर 5 रु प्रति मिनट हो गई. वे कहते हैं, ”हमारे चार लाख अर्द्धसैनिक बलों के लोग हैं. इन सभी के लिए कॉल दर 1 अप्रैल, 2011 से 5 रु. प्रति मिनट कर दिए गए। 

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अक्सर कुर्ता-पायजामा और सर्दियों में हाफ जैकेट पहनने वाले 36 वर्षीय पायलट का नए आइडिया को लेकर बहुत स्पष्ट सोच है. उनका मानना है, ”योजना फेल होने के डर से पहल ही नहीं करना अच्छी बात नहीं है. सचिन की यही सोच उन्हें अब तक के राजनैतिक करियर में बेदाग रखे हुए है, जबकि संचार मंत्रालय में उन्होंने २जी घोटाले के आरोपी पूर्व केंद्रीय संचार मंत्री ए. राजा के साथ बतौर राज्यमंत्री काम किया. हालांकि इस मसले पर पायलट कहते हैं, ”यह घोटाला मेरे पदभार के समय से पहले का है. इस मामले में अदालत अपना निर्णय करेगी, लेकिन हमारी सरकार ने कभी किसी आरोप पर कार्रवाई से संकोच नहीं किया.”

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सचिन विरासत की राजनीति पर कहते हैं, ”मैं नहीं समझता हूं कि बहुत ज्यादा फर्क पड़ता है कि कौन किस कोख से पैदा हुआ है, फर्क इससे पड़ता है कि आप अपने राजनैतिक जीवन में किस तरह से काम करते हैं. कितना आप लोगों को साथ लेकर चल सकते हैं क्योंकि हर व्यक्ति किसी न किसी धर्म-जाति से बंधा हुआ है.”

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जमीनी नेता को किस तरह काम करना चाहिए, यह उन्होंने अपने पिता से सीखा है. पायलट कहते हैं, ”मेरे पिताजी कहा करते थे कि दिल्ली में सरकार ने हमें यह बंगला इसलिए दिया है कि यहां हम लोगों को बिठाकर बात कर सकें, उन्हें लगना चाहिए कि उनकी बात सुनने वाला कोई है.”

 

इस सीख को अपने राजनैतिक जीवन में पायलट ने भी साकार किया है. सुबह 7 बजे उठकर चाय की चुस्की के साथ अखबार पढऩा और 2-3 घंटे आम लोगों से मिलना उनका रुटीन है. समय मिलने पर कभी-कभार व्यायाम भी कर लेते हैं. खाने में राजमा-चावल उन्हें इस कदर पसंद है कि बचपन में वे कई बार लगातार हफ्ते भर तक इसे खाते थे. 

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धर्म में उनकी बहुत रुचि नहीं है. वे बताते हैं, ”मैं बहुत ज्यादा कर्मकांड में विश्वास नहीं करता. लेकिन मेरी मां होली-दीवाली भजन या पूजा कराती हैं तो मैं वहां चुपचाप जरूर बैठ जाता हूं.” लेकिन पायलट को फिल्म देखने का बहुत शौक है. हालांकि यहां भी वे जल्दबाजी नहीं दिखाते, बल्कि पहले हफ्ता-दस दिन इंतजार करते हैं और उस फिल्म की बहुत चर्चा होती है तो ही देखते हैं.

लेकिन उन्हें घर में बैठकर फिल्म देखना पसंद नहीं, बल्कि जब भी फिल्म देखने का मन हुआ पायलट किसी भी मॉल के सिनेमा हॉल में चले जाते हैं. कॉलेज के समय शूटिंग के अलावा बैडमिंटन, क्रिकेट, फुटबॉल के शौकीन पायलट ने 4-5 साल तक नेशनल स्तर पर शूटिंग में अवार्ड हासिल किए हैं. 

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दिल्ली यूनिवर्सिटी के सेंट स्टीफंस कॉलेज से ग्रेजुएशन और अमेरिका के व्हार्टन स्कूल से एमबीए करने के बाद पायलट ने बीबीसी के दिल्ली ब्यूरो में काम किया. उसके बाद वे जनरल मोटर्स में भी दो साल नौकरी कर चुके हैं. लेकिन 6 सितंबर, 2012 को वे अपनी जिंदगी का महत्वपूर्ण क्षण मानते हैं जब 6-8 महीने की कड़ी मेहनत और परीक्षा के बाद उन्हें टेरीटोरियल आर्मी में लेफ्टिनेंट का पद मिला.

26 साल की उम्र में सांसद बनकर देश के सबसे युवा सांसद का खिताब पा चुके पायलट उस दिन देश के पहले केंद्रीय मंत्री बन गए जो टेरीटोरियल आर्मी में नियमित रूप से जुड़े. वे इसे अपने पिता का सपना बताते हैं. हालांकि पिता के असामयिक देहांत का जख्म आज भी उनके जेहन में हरा है. पायलट कहते हैं, ”बहुत कठिन समय रहा परिवार के लिए. हमेशा जख्म हरे से रहते हैं.”

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पायलट का विवाह भी राजनैतिक सुर्खियों में रहा था. 2004 में उनकी शादी जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा केंद्रीय मंत्री फारूक अब्दुल्ला की बेटी सारा से हुई. दोनों का मजहब अलग होने की वजह से स्वाभाविक दिक्कतें आईं, लेकिन उन्होंने इसे सहजता से पार किया. वे अपने इसी संबंध की वजह से जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस-एनसी गठबंधन सरकार की धुरी बने.

अब तक अपनी राजनीतिक सोंच और समझ से तेज़ी से आगे बढ़ रहे पायलट की चुनौती राजस्थान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद से काफी बढ़ गई है. राहुल गांधी ने कांग्रेस उपाध्यक्ष के रूप में पार्टी की कमान संभालने के बाद से युवा नेतृत्व पर फोकस किया है. सचिन उसी कड़ी के एक अहम् अंग माने जाते हैं. उनके मुताबिक, ”परिवर्तन सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि एक सोच में भी है कि पार्टी को एक नए सांचे में ढालना है. इसके चलते जमीनी स्तर पर लोगों को रि-कनेक्ट करना है ताकि पार्टी की सोच को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाया जा सके और अधिक लोगों को पार्टी से जोड़ा जा सके।

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लेकिन यह बदलाव राजस्थान में कितना कारगर होगा? वसुंधरा सरकार के खिलाफ कांग्रेस के प्रदर्शन में भीड़ का न जुटना और अब सरदारशहर सीट से कांग्रेस विधायक भंवरलाल शर्मा की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से मुलाकात के बाद सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ बोलना यह साबित करता है कि पायलट की राह आसान नहीं है. अब जब कांग्रेस राजस्थान में एक बार फिर सत्ता में आ रही है तो अब देखना यह है की सचिन पायलट, कांग्रेस को सही राजनैतिक उड़ान कैसे दे पाते है और इसकी जनता के बीच लैंडिंग किस प्रकार करते हैं।