आपके मोबाइल और लैपटॉप का रिमोट अब मोदी के हाथों में। निजी ज़िन्दगी भूल जाओ।

नमस्कार दोस्तों,

दोस्तों जबसे मोदी जी देश के  प्रधानमंत्री बने हैं तभी से वो एक के बाद एक ऐसे फैसले कर रहे हैं जो देश की जनता के दिलों को भय से भर दिया है। जबसे उन्होंने 8 नवंबर 2016 की शाम 8 बजे मीडिया में आकर नोटेबंदी का फैसला सुनाया था तभी से देश की मासूम जनता उनसे काफी डरी हुई है। देश अभी भुला नहीं है की कैसे  गरीबों की मेहनत की कमाई जिसे वह अपने बुरे वक़्त के लिए अपने परिवार से छुपा कर कहीं रखा था मोदी जी ने उसे एक झटके में अवैध घोषित कर दिया और उसे परिवार के सामने उजागर कर परिवार में उसकी विश्वस्ता  पर सवाल खड़ा कर दिया था।

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आठ नवंबर की रात से देश की जनता का वह वर्ग जिसके पास टीवी या रेडियो पर न्यूज़ सुनने की फुर्सत नहीं रहती थी वह भी अपने काम से समय चुरा कर न्यूज़ देखने लगा की पता नहीं अब मोदी जी किस नए फैसले से उनके पेट पर लात मारेंगे। भले ही अपने जीवन में उन्होंने मनोरंजन के लिए  कभी समय न निकाला हो पर मोदी जी के नोट बंदी के फैसले ने उन्हें न्यूज़ देखना जरूर सीखा दिया।

दोस्तों मोदी जी हमेसा से ही अपने दौरों और फैसलों से सुर्ख़ियों में बने रहते हैं। उन्होंने के बार फिर एक नए फैसले से जनता का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित करने में कामयाबी हासिल की है। इस बार भी उन्होंने अपने फैसले से आम जनता सबसे बड़ी निजी संपत्ति पर प्रहार करते हुए उसे सार्वजनिक संपत्ति बना दिया है। आइये जानते हैं की मोदी जी ने इस बार ऐसा क्या किया है की  पूरा देश दहशत में है।

दोस्तों, इंसान की प्राइवेसी अर्थात निजी जिंदगी उसकी सबसे बड़ी संपत्ति है और देश के संविधान द्वारा आम इंसान को मिला सबसे बड़ा मौलिक अधिकार भी। पर इस बार मोदी जी ने आपके इसी मौलिक अधिकार पर प्रहार करते हुए आपकी प्राइवेसी पर झांकने का अधिकार 10 सरकारी संस्थाओं को सौप दिया है।

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अब आपका मोबाइल और कंप्यूटर पर आपसे ज्यादा इन दस सरकारी संस्थाओं और मोदी जी की नज़र रहने वाली है। आप कब क्या कर रहे हैं, किससे  बात कर रहे हैं लैपटॉप और मोबाइल पर आपके द्वारा की गई हर मूवमेंट की खबर मोदी जी और उनके ये दस सरकारी विभागों को हमेसा रहने वाली है। ये सरकारी विभाग जब चाहें आपकी निजी डाटा देख सकते हैं और उसे हैक कर अपने सिस्टम में भी ले सकते हैं। ताज्जुब की बात यह है की उन्हें ऐसा करने का सरकारी अधिकार मिल चूका है। यदि आप अपनी निजता पर दखलंदाजी का विरोध करते हुए डाटा एक्सेस की अनुमति देने से मना करते हैं तो आपको 7 साल की कैद हो सकती है।

 

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अब आप चाहकर भी अपने मौलिक अधिकारों की रक्षा नहीं कर सकते क्योंकि मौलिक अधिकारों का हनन करने वाला कोई और नहीं बल्कि खुद हमारी सरकार है जिसे हमें चुनकर सत्ता में बिठाया है। अगर मैं यह कहूं की जो हमसे चौकीदार बनाने की गुहार लगाकर सत्ता में आया था वही अब हमारा सर्वस्व स्वामी बन चूका है तो यह गलत नहीं होगा। तो दोस्तों देखते हैं की अपने इस कदम के बाद मोदी जी और किस प्रकार हमारी साँसों की चौकीदारी करते हैं और कौनसा अगला कदम उठाते हैं।

 

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जरा इस बात का अंदाज़ा लगते हुए सोचिये की इस बात की क्या ग्यारंटी है की डाटा एक्सेस करने के  लिए अधिकृत की गई इन दस संस्थानों में को एक भी सदस्य बेईमान नहीं होगा और आपकी निजी डाटा का दुरूपयोग कर या उसमे छेड़छाड़ कर आपको ब्लैकमेल नहीं करेगा या आपको फसायेगा नहीं। मेरे सभी पाठकों से मेरा यह निवेदन है की मेरी इस बात पर गहराई से सोंचे और कमेंट करके मुझे अपना जवाब जरूर बताएं।

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