2018 को कीजिये अलविदा और स्वागत कीजिये 2019 का। जानिये साल की पांच बड़ी घटनाएं।

नमस्कार दोस्तों,

दोस्तों, देखते देखते साल 2018 का अंत भी निकट आ ही गया। बस कुछ ही दिन होर फिर हम सब नए साल 2019 का स्वागत कर रहे होंगे। 31 दिसंबर की रात सभी के लिए बहोत ही खास होता है इस दिन का माहौल किसी बड़े त्यौहार से भी ज्यादा  होता है। लोग छुट्टियां लेकर पिकनिक मानते हैं. फैमली के साथ आउटडोर का मज़ा लेते हैं, कुछ लोग हिल स्टेशन में तो कुछ लोग अपने घर पर ही रहकर इस रात को दिल खोलकर एन्जॉय करते हैं। यह दिन एक अलग ही अहसास करता है क्योंकि इस दिन हम पुराने वर्ष को विदा भी कर रहे होते हैं और नए वर्ष का स्वागत भी। वक़्त भले ही बीत जाती है पर वह हमें कुछ ऐसी अच्छी बुरी यादें दे जाती है जिन्हे हम चाह कर भी भुला नहीं सकते। आइए जानते हैं 2018 में घटी कुछ ऐसी महत्वपूर्ण घटनाओं के बारे में जिन्हे कभी भी भुलाया नहीं जा सकता।

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1. सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को मिला प्रवेश। 


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दोस्तों इस साल सुप्रीम कोर्ट ने शदियों पुरानी परंपरा को बदलते हुए केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबन्ध को उनका मौलिक अधिकार बताते हुए उन्हें प्रवेश की कानूनी अनुमति दे दी। आपको बतादें की यह मामला धार्मिक आस्था से जुड़ा होने के कारण काफी संवेदनशील था। इस फैसले से पूर्व  सबरी माला मंदिर में 8 वर्ष से लेकर 65 तक की उम्र की महिलाओं को मंदिर प्रवेश की अनुमति नहीं थी। महिला संगठनों ने इस नियम का विरोध करते हुए मंदिर प्रवेश की मांग की थी जिसे कोर्ट ने महिलाओं के हक़ में फैसला सुनते हुए उन्हें मंदिर प्रवेश की अनुमति दे दी। 28 सितम्बर को तात्कालिक मुख्या न्यायाधीश दीपक मिश्रा वाली संविधान पीठ ने यह फैसला सुनाया।

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2. स्टेचू ऑफ़ यूनिटी।  


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इसी साल गुजरात के केवडिया में सरदार वल्लभ भाई पटेल की 182 मिटेर ऊँची मूर्ति का उद्घाटन किया गया। इस मूर्ति को स्टेचू ऑफ़ यूनिटी का नाम दिया गया है। आपको बता दें की इस मूर्ति के उद्घाटन होते ही भारत दुनिया का एकमात्र ऐसा देश बन गया है जहां दुनिया की सबसे ऊँची बनाई गई है। आपको बता दें स्टेचू ऑफ़ लिबर्टी भी इससे काफी छोटी है। 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभ भाई पटेल के जन्म दिवस पर उनकी इस मूर्ति का उद्घाटन प्रधान मंत्री मोदी द्वारा किया गया। इस मूर्ति के निर्माण में कुल 3000 करोड़ रुपये का खर्च बताया गया है।

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3 . राफेल विवाद पर फैसला। 




कांग्रेस एवं अन्य विरोधी पार्टी द्वारा प्रधानमंत्री मोदी एवं केंद्र सरकार पर लगाए गए राफेल डील पर घोटाले के आरोप को बेबुनियाद बताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को क्लीन चिट देदी जिसके बाद राहुल गाँधी का खूब मज़ाक उड़ाया गया। हलाकि कांग्रेस अभी भी अपने इन आरोपों को सही बताते हुए मोदी सरकार पर सुप्रीम कोर्ट में गलत तथ्य पेश करने का आरोप लगाया है। कांग्रेस के इस आरोप को खुद बीजेपी ने अपने एक हलफ नाम से सही साबित कर दिया जिसमे बीजेपी ने सुप्रीम कोर्ट से अपने निर्णय में कुछ बिंदुओं पर फेरबदल की मांग की है।

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4 . समलैंगिकता को मिली कानूनी मान्यता। 

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सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल सितम्बर माह में समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर करते हुए इसे व्यक्तिगत जीवन शैली घोषित कर दिया।

5 . मस्जिद में नमाज़ का मुद्दा। 



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अयोध्या के राम जन्मभूमि का विवाद भी साल भर देश की राजनीति में छाया रहा और अभी भी इसपर सभी राजनितिक पार्टियों की और से राजनीति की जा रही है। कोर्ट ने इस पर अपना फैसला देकर यह साफ़ कर दिया है की मस्जिद को इस्लाम का हिस्सा नहीं मानने वाले साल 1994 के इस्माइल फारुकी फैसले का वर्तमान में राम जन्मभूमि विवाद से कोई भी सम्बन्ध नहीं है और इस मुद्दे पर दोबारा विचार की कोई जरुरत भी नहीं है।

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जिस 1994 के फैसले का यहां पर जिक्र किया गया है उसमे संविधान पीठ ने यह माना था की नमाज़ कहीं भी, यहां तक की खुले मैदान में भी पढ़ी जा सकती है।  नमाज़ अदायगी के लिए मस्जिद जरुरी नहीं है। इसपर मुस्लिम पक्ष का कहना था की कोर्ट के इस फैसले से पूरा भूमि विवाद प्रभावित हुआ है। लखनऊ पीठ ने साल 2010 में इसी फैसले के आधार पर राम जन्मभूमि के तीन हिस्से करने का फैसला दिया था, क्योंकि संविधान पीठ कह चुकी थी की मस्जिद इस्लाम का अभिन्न अंग नहीं है।