कादर खान के बेटे ने गोविंदा पर तंज़ कसते हुए बॉलीवुड को कहा संवेदनहीन।

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नमस्कार दोस्तों,

दोस्तों, बीते जमाने के मशहूर कॉमेडियन, एक्टर और लेखक कादर खान का 31 दिसम्बर की शाम 6 बजे मृत्यु हो गई। वे 81 वर्ष के थे और काफी लम्बे समय से बिमारी से जूझ रहे थे। कादर खान के मौत के बाद सभी बड़े छोटे कलाकारों ने उनके मौत पर शोक व्यक्त किया। किसी ने ट्वीट कर तो किसी ने मीडिया के माध्यम से अपना दुःख व्यक्त किया।

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कादर खान के निधन के बाद उनके बेटों को फिल्म जगत के कई बड़े हस्तिओं ने कनाडा में एक फोन तक नहीं किया। बॉलीवुड के एक दिग्गज हस्ती की मौत पर अन्य कलाकारों की ऐसी संवेदनहीनता से उनके बेटे काफी आहत हैं। कादर खान के बेटे सरफ़राज़ ने कहा ” मेरे पिता फिल्म इंडस्ट्री के कई बड़ी हस्तियों को काफी करीब से जानते थे और अपने जीवन एवं हुनर का एक बड़ा हिस्सा उन्होंने बॉलीवुड को दिया। वे बच्चन साहब को सबसे ज्यादा प्यार करते थे। जब भी मैं अपने पिता से पूछता था की वे फिल्म जगत से किस शख़्स को सबसे ज्यादा याद करते हैं तो वे तुरंत बच्चन साहब का नाम लेते थे। ये प्यार दोनों की तरफ से था। मैं बच्चन साहब को बताना चाहता हूँ की मेरे पिता आखरी वक़्त तक उन्हें याद करते थे।”

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कादर खान और गोविंदा की जोड़ी बॉलीवुड की सबसे इंटरटेनिंग जोड़ी मानी जाती है। उन्होंने एक साथ कई हिट फ़िल्में दी हैं। हर वक़्त के दर्शकों ने कादरखान और गोविंदा की कॉमिक जोड़ी को काफी पसंद किया है। कादर खान की मौत की खबर के बाद गोविंदा का एक बयान सामने आया है जिसमे उन्होंने शोक व्यक्त करते हुए कहा है की ” कादर खान मेरे उस्ताद ही नहीं बल्कि पिता समान थे। गोविंदा के इस बयान के बाद कादर खान के बेटे सरफ़राज़ खान ने गोविंदा पर तंज़ कसते हुए कहा कि ” जरा उनसे (गोविंदा) पूछिए की कितनी बार उन्होंने मेरे पिता के सेहत के बारे में पूछा था। और क्या पिता के देहांत के बाद एक भी बार हमसे फोन पर बात करने की ज़ेहमत की, फिल्म इंडस्ट्री अब उनके लिए ऐसी जगह बन चुकी है जहां उनके लिए कोई रियल फीलिंग नहीं है जिन्होंने भारतीय सिनेमा में अपना योगदान दिया हो ” सभी टॉप एक्टर्स को रिटायर्ड दिग्गज कलाकारों के साथ तस्वीरों में देखा जाता है पर यह प्यार केवल तस्वीरों तक ही सीमित रहता है। इससे ज्यादा कुछ नहीं। ध्यान दें की ललिता पवार जी और मोहन छोटी जी की किस हालत में मृत्यु हुई थी.”

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सरफराज ने आगे कहा की “खुशकिस्मती से मेरे पिता के देख भाल के लिए उनके तीन बेटे थे। पर उन लोगों के लिए क्या कहेंगे जो बिना की फाइनेंसियल और इमोशनल सपोर्ट के अकेलेपन का दुःख भोगते हुए मर जाते हैं। जिस वक़्त मेरे पिता की मृत्यु हुई उस वक़्त वे मुस्कुरा रहे थे। उनकी वह स्माइल मेरे लिए दुनिया की सबसे अनमोल चीज़ थी. उनके अंतिम दिन काफी तकलीफ में बीते।”

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