थम नहीं रहा मासूमों के साथ दुराचार का अपराध, आखिर कौन है ज़िम्मेदार?

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नमश्कार दोस्तों,

दोस्तों, अच्छाई और बुराई हमारे समाज के दो पहलु हैं, जिस तरह एक सिक्के के दो पहलु होते हैं, एक नदी के दो किनारे, दिन के बाद रात ठीक उसी प्रकार इस दुनिया में जहाँ जहाँ मानव सभ्यता के कदम पड़े हैं वहां अच्छे और बुरे दोनों तरह के इंसान रहते हैं। पर कभी कभी हमारे आस पास घटी कुछ ऐसी घटनाओं के बारे में पता चलता है जो की इंसानियत की नींव ही हिला कर रख देती है।

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जब से मानव सभ्यता का विकाश हुआ है तभी से मानव समाज में अपराध और अपराधी भी पनपते रहे हैं। पर जैसे जैसे इंसानी सभ्यता, सफलता की ऊंचाई को छू रहा है वहीँ इसी सभ्य मानवीय समाज के बीच से कुछ ऐसे अपराधों की खबर आती है जो इंसानियत के चीथड़े उड़ाने के लिए काफी हैं। अपराध और अपराधी शब्द भी जब किसी जुर्म और मुज़रिम को सम्बोधित करने के लिए कम लगने लगे तो समझिये की शायद हमने अपनी आँखें खोलने में देर कर दी।

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दोस्तों हम इंसानों की सबसे बड़ी विडंबना यह है की जब कोई अपराध किसी और के साथ होता है तो हम थोड़ा भावुक होकर सहानुभूति जता देते हैं और यह समझते हैं की हमने अपनी नैतिक ज़िम्मेदारी पूरी कर ली और इससे ज्यादा हम कर भी क्या सकते हैं। जब तक कोई घटना हमारे साथ न घटित हो तब तक हम उस अपराध और अपराधी को गंभीरता से नहीं लेते। जिसका की पुरे मानव समाज को दूरगामी परिणाम भुगतने पड़ते हैं। शायद आज हम वक़्त के उसी दौर पर पहुंच चुके हैं जब हम किसी अपराध के प्रति अपनी अनदेखी का दूरगामी परिणाम भुगत रहे हैं।

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दोस्तों यदि 2 साल की मासूम बच्ची से लेकर 65 की वृद्धा तक के सम्मान के लूटने की खबर सुनकर आपका खून नहीं खौलता तो जरा वक़्त निकालकर अपना डीएनए जांच कराकर इस बात की तसल्ली कर लें की क्या आप सच में इंसान हैं भी की नहीं। यदि वक़्त रहते मानव समाज के उच्चाधिष्ठ पदाधिकारी और आम जनता ने ऐसी घटना का प्रारम्भ में ही विरोध किया होता और ऐसे विकृत मानसिकता के जानवरों को फांसी पर लटका दिया होता तो शायद ऐसे घटनाओं पर हम थोड़ा अंकुश लगा पाते।

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मेरे मन में एक सवाल हमेसा से पनपता रहा है की आखिर ऐसे विकृत किस्म के अपराध और अपराधी का जन्म कब और कैसे हुआ। क्योंकि जब हम बीमारी की जड़ों को जान लेंगे तभी उसे जड़ से उखाड़ पाने में कामयाब हो पाएंगे। विकृत मानसिकता के अपराधी समाज के लिए किसी बड़ी बीमारी से कम नहीं है। यह जान पाना बहोत मुश्किल होगा की इस तरह की पहली घटना कब कहाँ और किसके साथ घटी होगी क्योंकि किसी भी कार्य की पुनरावृत्ति तभी होती है जब इस तरह की पहली घटना को उजागर ही नहीं होने दिया जाता और उसे दबा दिया जाता है। पर हम इन घटनाओं के पीछे के कारण और अपराधी के इस विकृत मानसिकता को जरूर समझ सकते हैं।

 

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अब मैं जो बात आपको बताने जा रहा हूँ उसे सुनने के बाद शायद आपको इस बात का अहसास हो जाए की इस तरह की घटना के लिए काफी हद तक हम भी ज़िम्मेदार हैं। हम इसलिए ज़िम्मेदार हैं क्योंकि हमने अपने आस पास और अपने घर में ऐसे माहौल को पनपने दिया और नज़र अंदाज़ किया जो की इन विकृत मानसिकता के अपराधियों के पनपने के लिए असली ज़िम्मेदार हैं। आपको यह जानकार सायद आश्चर्य होगा की इस तरह के अपराधों को जन्म देने वाले विकृत अमानवीय सोंच को जाने अनजाने में हम सभी ने अपने घर में ही पोषित होने दिया है। आइये जानते हैं वो कौन सी चीजें हैं जिसने इंसानों की सोच को इस हद तक विकृत कर दिया कि जिस नवजात बच्चे को देखकर मन में वात्सल्य उत्पन्न होना चाहिए उसे देखकर वासना पनपने लगी है।

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1 . टेली – विज़न

दोस्तों जबसे टेलीविज़न का आविष्कार हुआ और इसने हमारे घर में अपनी जगह बनाई है तबसे इसने हमारे व्यक्तित्व और विचारों को काफी प्रभावित किया है। हम अपना काफी समय टेली-विज़न के सामने बैठकर बिताते हैं। अपने घर और घर के सदस्यों कुछ भी खरीदना हो तो हम सबसे अधिक टीवी पर दिखाए गए विज्ञापन पर भरोसा करते हैं। यही वजह है की जिन निजी वस्तुओं के बारे में हम अपने अति घनिष्ठ व्यक्ति के साथ भी चर्चा नहीं करते थे अब उन वस्तुओं के विज्ञापन टीवी पर लगातार चलते रहते हैं और हम सह-परिवार उसे देखते भी हैं। हर पांच मिनट के बाद टीवी पर आने वाला गंदे विज्ञापन धीरे धीरे हमारे बच्चों के कोमल मन को किस तरह विकृत कर रहा होता है हमें इस बात का अंदाज़ा तक नहीं होता। क्या आपने सोचा है कि जब सनी लिओनी ने बॉलीवुड में कदम रखा और उसके अतीत से अनजान छोटे बच्चे उसके फैन बन गए तो इसका उन पर क्या प्रभाव पड़ा होगा।

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2. इंटरनेट

आज पूरी दुनिया हमारे हाथों में समाई हुई है। हाथ में मोबाइल और मोबाइल पर गूगल है जहाँ हमारे सारे सवालों के जवाब मौजूद हैं। अब आप सोचिये की जब सनी लियोनी के किसी प्रशंसक बच्चे ने पहली बार गूगल पर सनी लिओनी का नाम सर्च किया होगा तो इसका उसे क्या परिणाम मिला होगा। मेरे ख्याल से हम सभी जानते हैं की सनी लियोनी के नाम सर्च करने पर क्या परिणाम मिलते हैं और उन परिणामों का बच्चों पर क्या असर हुआ होगा। लेकिन जब सनी लिओनी को स्टार बनाया गया तो हम में से किसी ने भी इस बात का विरोध नहीं किया।

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मोदी सरकार ने इंटरनेट पर परोसी जा रही अश्‍लीलता को ख़त्म करने के लिए कुछ वेबसाइटों पर भारत में बैन कर ज़रूर कुछ हद तक कामयाबी हासिल की है पर सही मायने में इस तरह के अपराधों के लिए इंटरनेट से ज्यादा टेलीविज़न ज़िम्मेदार है क्योंकि वेबसाइटों पर तो लोग जानबूझकर जाते हैं पर टीवी पर अश्‍लीलता लगातार परोसी जाती है जिसपर किसी का कोई लगाम नहीं है।

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दोस्तों, आप मेरी इस बात से कितना सहमत हैं ये आप मुझे कमेंट करके जरूर बताएं। यदि आपने अभी तक मुझे फॉलो नहीं किया है तो आप मुझे फॉलो करना न भूलें साथ ही इस आर्टिकल को लाइक जरूर कर दीजियेगा, धन्यवाद्।

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