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नदी के किनारे पड़े मिले मोदी जी के जन-धन खातों के एक ही बैंक के 350 ATM कार्ड

narendra modi jandhan yojna account holders atm card found near panam river in godhra gujarat, police investigating

 
 
नमस्कार दोस्तों,
गोधरा गुजरात के पंचमहाल जिले में रामपुर गांव के पास से होकर बहने वाली पानम नदी के किनारे प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत खुलवाए गए खातों से जुड़े 350 से अधिक बैंक एटीएम कार्ड बरामद किए गए हैं। पुलिस ने बताया कि पानम नदी के किनारे खेल रहे बच्चों से मिली सूचना पर ये कार्ड बरामद किए गए। इन पर जनधन योजना का प्रतीक चिन्ह बना हुआ है और इनपर खाताधारकों के नाम भी हैं। जानकारी मिलते ही स्थानीय बैंक के अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए।
 
 
नदी के किनारे पड़े मिले एटीएम कार्ड

 

 

गुरुवार को बैंक खुलने के बाद ही पता चल पायेगा कि कार्ड किन-किन लाभार्थियों के नाम से हैं और इसे नदी के किनारे क्यों फेंका गया? पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की कार्यवाही शुरू कर दी है। रामपुर गांव में पानम नदी के किनारे फेंके गए बैंक एटीएम कार्ड को पुलिस ने बरामद किया।
 
स्टेट बैंक के 300 से ज्यादा एटीएम कार्ड जब्त हुए हैं

बुधवार को यहां की पानम नदी से 350 से अधिक बैंक एटीएम कार्ड जब्त हुए हैं। ये सभी एटीएम कार्ड स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया के हैं। पुलिस मामला दर्ज कर आगे की छानबीन शुरू कर दी है।
पाठकों से मेरा निवेदन है की आप सभी मुझे सब्सक्राइब करना न भूलें।  धन्यवाद्. 
 
 

आरक्षण, मानवता पर पांच हजार साल पुराना कलंक

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नमस्कार,
दोस्तों आरक्षण एक ऐसा शब्द है जिसका नाम लेते ही माहौल गरमा जाता है. हर नेता चाहे वह राजनीती में नया हो या पुराना, इस मुद्दे की ताकत को अच्छी तरह पहचानता है. और इसका फायदा उठाना भी जानता है. जितना बड़ा मुद्दा बाबरी मस्जिद या अयोध्या राम मंदिर का है उतना ही बड़ा मुद्दा आरक्षण का है.
राजनीती का और नेताओं का पूरा भविष्य इन्ही दो मुद्दों पर हमेशा से टिका रहा है और टिका रहेगा. क्योंकि इस मुद्दे को ख़त्म करने की चाह किसी भी नेता में नहीं. अगर ये मुद्दे ख़त्म हो गए तो नेताओं की दाल रोटी चलनी बंद हो जायेगी.
मित्रों, जैसे आज एस टी , एस सी और ओ बी सी के लिए बाबा साहब आंबेडकर के निर्देश अनुसार समाज, रोजगार और संविधान में कुछ स्थान सुरक्षित है जिसे हम आरक्षण कहते है ठीक उसी प्रकार जब ब्राम्हणों ने मनुवाद बनाया तो सारे विशेष अधिकार ब्राम्हण और क्षत्रियों को मिला जो की स्वयं को ऊँची जाती घोसित कर अन्य दो जाती पर अत्याचार करना अपना अधिकार समझते थे और आज भी समझते हैं.
आइये जानते हैं की इन्हे किस प्रकार के अधिकार प्राप्त थे.
१. मंदिरों में केवल ब्राम्हण ही पुजारी हुआ करते थे और केवल क्षत्रियों को ही मंदिर में जाने की इजाजत हुआ करती थी अन्य दो जाती शूद्र और वैश्य के जाने से मंदिर अपवित्र हो जाता था. उन्हें कोड़े मारने और प्रताड़ित करने से भगवान् प्रशंन्न होते हैं ऐसा इन मनुवादियों का मानना है.
२. शिक्षा का अधिकार केवल ब्राम्हण और क्षत्रियों को था.
३. केवल क्षत्रिय ही शाशक बन सकता था. शूद्र और वैश्य को चाहे वह कितना भी बुद्धिमान क्यों न हो उसे केवल सेवक बनकर रहने का आदेश था.
४. शूद्र और वैश्य को नंगे पांव रहने के लिए कहा जाता था. और क्षत्रिय एवं ब्राम्हण के सामने मुँह छुपा कर रहना पड़ता था.
५. शूद्र एवं वैश्य को राज्य के किसी भी ऐसे जल श्रोत से पानी पिने की मनाही थी जिसमे क्षत्रिय और ब्राम्हण पानी पीते हों.
अब आप ही बताइए की सबसे बड़ा आरक्षण किनको मिला हुआ है. बाबा साहब ने इसी असंतुलन को ख़त्म करने के लिए संविधान में एस टी , एस सी और ओ बी सी, जिन्हे ये छोटी जाती कहते हैं के लिए आरक्षण का अधिकार दिया ताकि इन्हे समानता का अधिकार दिया जा सके.
बड़ी हसी की बात है की जो लोग 5000 सालों से आरक्षण का सुख भोग रहे हैं वो शोषित वर्ग को मिल रहे आरक्षण के कुछ प्रतिशत से ही केवल 60 साल में ही घबरा गए. जबकि खुद सौ प्रतिशत आरक्षण का सुख शदियों से भोगते आ रहे हैं.इसी से सिद्ध होता है की खुद को ऊँची जाती कहने वाले इन कथित छोटी जाती वालों से कितना कमजोर है.
पर हम अब भी उन ऊँची जाती वालों को खुली चुनौती देते हैं की आप जातिवाद छोड़ दो हम आरक्षण छोड़ देंगे. धन्यवाद्.

जानिये कौन है एम् जे अकबर, क्यों दुनिया भर की महिला पत्रकार उनपर लगा रही हैं संगीन आरोप.

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नमस्कार दोस्तों,
#MeToo कैंपेन के तहत अनेकों महिला पत्रकारों के द्वारा दुर्व्यवहार एवं उत्पीड़न के आरोपों के बाद केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री मोबाशर जावेद यनेकी एमजे अकबर को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। एक वरिष्ठ पत्रकार से राजनीती में आये एवं केंद्रीय मंत्री बने एम् जे अकबर का परत्राकरिता से राजनीति तक का सफर बड़ा ही शानदार रहा. लेकिन मीतू पर महिलाओं डरा लगाए गए दुर्व्यवहार व उत्पीड़न के आरोपों के बाद मंत्रिमंडल व विपक्ष से बन रहे दबाव के चलते उन्हें अपना पद त्यागना पद गया. पर लेकिन दशकों पुराने मामले उजागर होने के बाद उन्हें कुर्सी छोड़नी पड़ी.
आइये जानते हैं कौन है एम् जे अकबर.
एक समय पर देश के सबसे चर्चित पत्रकार व सम्पादक रहे एम् जे अकबर अब इस देश के सबसे बड़ी हस्तियों में से एक बन चुके हैं. जब से इनपर महिला पत्रकारों द्वारा दुर्व्यवहार व उत्पीड़न का आरोप लगाया गया है तबसे इनके बारे में पूरा देश जानना चाहता है.11 जनवरी, 1951 को जन्मे एम् जे अकबर अब 67 वर्ष के हो चुके हैं. एमजे अकबर ने 1989 में लोकसभा चुनाव जीतकर राजनीति में अपना पहला कदम रखा था. उस वक़्त वे कांग्रेस के टिकट पर जीते थे, इसके बाद एक बार फिर से सांसद बने. पाकिस्तान का वर्तमान और भविष्य, नेहरू: द मेकिंग ऑफ इंडिया जैसी चर्चित पुस्तकों के लेखक हैं एमजे अकबर. एशियन एज, डेक्कन क्रॉनिकल, इंडिया टुडे और द टेलीग्राफ जैसे बहुचर्चित और नामी मीडिया संस्थानों में संपादक रह चुके हैं.
साल 1991 में भले ही एम् जे अकबर चुनाव जीते थे, पर जितने बाद राजनीति को इतनी जल्दी समझ पाना उनके लिए मुंकिन नहीं हुआ और वे ज्यादा दिनों तक राजनीति में टिक नहीं पाए और वापस पत्रकारिता के क्षेत्र में चले गए. 2014 में एक बार फिर देश के राजनितिक गलियारों में उनका नाम शुमार हुआ जब वे कांग्रेस का दमन छोड़ कर बीजेपी के साथ जुड़ गए. इसके बाद 2015 में बीजेपी ने एम् जे अकबर को राज्यसभा में भेजा. 5 जुलाई, 2016 को प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया, लेकिन #MeToo कैंपेन के तहत लगे इल्ज़ामों के चलते उन्हें अपना पद छोड़ना पड़ा.
एम् जे अकबर पर लगे आरोपों को इसलिए भी गंभीरता से लिया जा रहा है क्योंकि उनपर अबतक जितनी भी महिलाओं ने आरोप लगाए हैं वे कोई आम हस्ती नहीं बल्कि वरिष्ठ पत्रकारों की श्रेणी में आते हैं और एक समय एम् जे अकबर के साथ काम भी कर चुके हैं. उनपर सबसे पहला आरोप वरिष्ठ पत्रकार प्रिय रमानी ने लगाया जो की कभी एम् जे अकबर की असिस्टेंट हुआ करती थी.
एम् जे अकबर अपना पद खो चुके हैं और अब खुदपर लगे आरोपों के दाग धोने के लिए क़ानून का सहारा ले रहे हैं. अब देखना ये है की इस कानूनी जंग में जीत किसकी होती है.
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कैसी है हमारी स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, एक ही जगह जानिए इस प्रतिमा के बारे में सब

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नमस्कार दोस्तों,
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीने बुधवार को सरदार वल्लभ भाई पटेल की 182 मीटर ऊंची प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ का उद्घाटन किया. यह प्रतिमा दुनिया का इकलौता और सबसे ऊँचा प्रतिमा है. यह प्रतिमा देश के गौरव का प्रतीक है. आपने अमेरिका में ‘स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी’ और ऐसी ही कुछ विशालकाय प्रतिमाओं के बारे में जरूर कुछ सुना, देखा और पढ़ा होगा लेकिन, हमारी स्टैच्यू ऑफ यूनिटी या एकता की प्रतिमा, इन सभी प्रतिमाओं से काफी अधिक ऊँचा और भव्य है. यहां ये भी जान लीजिए कि वर्तमान में, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी से ऊंची और विशाल दुनिया में कोई प्रतिमा नहीं है. अब इतना पढ़ने के बाद, आपके जेहन में कई सवाल उठ रहे होंगे.
कहां बनी है स्टैच्यू ऑफ यूनिटी
वडोदरा के पास नर्मदा जिले में स्थित सरदार सरोवर के केवाड़िया कॉलोनी गांव में इस स्टेचू को बनाया गया है. यह 182 मीटर ऊंची है और 7 किलोमीटर दूर से ही इसे देखा जा सकता है.
किसने बनाई और कितना खर्च आया?
इस प्रतिमा को सरदार वल्लभ भाई पटेल राष्ट्रीय एकता ट्रस्ट (SVPRET) के द्वारा बनवाया गया है. इस प्रतिमा को बनाने के लिए L &T को जिम्मेदारी दी गयी थी. इस मूर्ति को बनाने में कुल ३५०० करोड़ रुपये खर्च हुए हैं. 
कितनी विशाल
सिर्फ अनुमान लगाइए की सरदार पटेल की प्रतिमा के 6 फीट के इंसान के कद से बड़े होंठ, आंखें और जैकेट के बटन, सात मंजिला इमारत जितना ऊंचा तो सिर्फ उनका चेहरा है. 70 फीट के हाथ और पैरों की ऊंचाई 85 फीट है. इतनी मजबूत कि 220 किमी प्रति घंटे की रफ्तार की हवाओं का भी इस पर कोई असर नहीं होगा.
सरदार साहब के दिल तक जाइए
इस स्टैच्यू के अंदर एक हाईटेक लिफ्ट है. इससे पर्यटक सरदार पटेल के हृदय तक जा सकेंगे. यहां से लोग सरदार सरोवर बांध के अलावा नर्मदा के 17 किमी लंबे तट पर फैली फूलों की घाटी का शानदार नज़ारा देख सकते हैं.
ये हैं दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमाएं

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1) स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (भारत): ऊंचाई 182 मीटर
2) स्प्रिंग टेम्पल बुद्ध (चीन): ऊंचाई 153 मीटर
3) यू्शिकु दाईबुत्शु (जापान): ऊंचाई 120 मीटर
4) स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी (अमेरिका): ऊंचाई 93 मीटर
5) द मदरलैंड कॉल्स (रूस): ऊंचाई 85 मीटर
6) क्राइस्ट द रीडीमर (ब्राजील): ऊंचाई 38 मीटर
कितने वक्त में तैयार हुई
इस विशालकाय मूर्ति को तैयार करने में पांच साल याने की 60 महीने का वक़्त लगा. आपको ये जानकर भी आश्चर्य होगा कि यह सबसे कम वक्त में बनने वाली दुनिया की विशालतम प्रतिमा भी है. अगर दूसरे नंबर पर आने वाली स्प्रिंग टेम्पल बुद्ध प्रतिमा जो कि चीन में है, उसका जिक्र करें तो उसे बनाने में 90 साल का सबसे लम्बा समय लगा था.

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भूकंप से बेअसर
इस प्रतिमा को भूकंप रोधी तकनीक एवं बेजोड़ इंजीनिरिंग से बनाया गया है. इस पर भरी भूकंप करभी कोई असर नहीं होगा. इसके साथ ही अन्य प्राकृतिक आपदाओं अर्थात तेज़ तूफ़ान या भारी बारिश से यह बेअसर रहेगा. और किसी विस्फोट से भी इसे गिराना काफी मुश्किल होगा.
स्टेचू ऑफ़ यूनिटी क
माध्यम से मोदी जी ने देश को दुनिया की नज़रों में एक सम्मान जनक स्थान दिलाने की कोशिश की है और साथ ही भारत के शांतिप्रिय इतिहास का और पहचान को पूरी दुनिया के सामने रखने की एक बेहतरीन कोशिश की है.